खिलाडी के जिद को सलाम “गोल्ड मेडल जीत कर ही बदली डिपी “

खेल मे सफल होने के लिए मेहनत व जिद्द बहुत महत्वपूर्ण है। सभी खिलाडी किसीनाकिसी ध्येय के साथ मैदान पर उतरते है। वे सपने पुर्ण करने के लिए मेहनत करते है। लेकिन कभी कभी खिलाडी मन मे जिद्द बना लेते हैं। कि अगर ऐसा होगा तो ही मै ऐसा करूंगा/करूंगी । ऐसे ही एक खिलाडी कि कहानी।

आजकल सोशल मीडिया जीवन का एक भाग बन गया है, कई खिलाडी सोशल मीडिया पर एक्टिव है, सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते है।

वह बोली थी “गोल्ड मिलेगा तभी व्हाट्स अप डीपी बदलुंगी” सच मे उसने गोल्ड जीत कर ही अपनी व्हाट्स अप डीपी बदली। यह कहानी अंतरराष्ट्रिय खिलाड़ी सोनाली शिंगाटे कि है।

नेपाल मे हुए १३ वे दक्षिण एशियाई खेलो के कबड्डी स्पर्धा मे भारतीय पुरुष व महिला दोनो गट मे गोल्ड मेडल जीता। भारतीय महिला टीम मे भारतीय रेल्वे से खेलनेवाली सोनाली शिंगाटे चयन हुवा था। अंतरराष्ट्रिय गोल्ड मिलने के बाद उसने २ वर्ष बाद अपनी डिपी बदली।

व्हाट्स अप डिपी बदलने मे इतना कुछ खास तो नहीं लेकिन २ साल पहले एशियाई कबड्डी चैंपियनशिप के लिए सिलेक्शन न होने के वजह से उसने एक प्रेरणादायी डीपी रखा था। तभी उसने कहा था अब डीपी तब ही बदलेंगी जब वे अंतरराष्ट्रिय स्पर्धा मे गोल्ड जितैंगी।

उसके बाद उसे लगभग २ साल तक रूकना पडा। २ साल उसने एक ही डीपी रखा ” जितने कि जिद्द इतनी रखो कि आपको हराने के लिए कोशिश नही तो साजिशे रचीनी चाहिये”। यह वाक्य का डीपी २ साल उसने रखा था।

पिछले साल ऐशियन गेम्स के लिए सोनाली की पहली बार भारतीय टीम में चयन हुवा था। तब वे गोल्ड नही जीत पाई थी। उसके बाद लगभग १५ महीनों के बाद साउथ एशियाई खेलों के लिए टीम में चयन हुवा। तब इस बार गोल्ड जीतकर ऊसने अपनी २ साल बाद डीपी बदली।

व्हाट्सएप डीपी को बदलना ये खास नहीं था, लेकिन सपने को पूरा करने के लिए सपने देखना बहुत सराहनीय था। सपनों को पूरा करने के लिए, बहुत कम खिलाड़ी होते हैं जो ऐसा हठ करते हैं। सोनाली की कड़ी मेहनत, दृढ़ संकल्प और दृढ़ता सभी खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायक है।